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चित्तौड़गढ़ में राष्ट्रीय भील सेना ने मनाया विश्व आदिवासी दिवस, शिक्षा और अधिकारों पर जोर

चित्तौड़गढ़ में राष्ट्रीय भील सेना ने मनाया विश्व आदिवासी दिवस, शिक्षा और अधिकारों पर जोर

चित्तौड़गढ़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय भील सेना के बैनर तले चित्तौड़गढ़ में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान और मध्यप्रदेश सहित विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में भील एवं आदिवासी समाज के लोग, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक एकता, शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

कार्यक्रम का नेतृत्व राष्ट्रीय भील सेना के संयोजक गोपाल भील आकोड़िया एवं राष्ट्रीय सहसंयोजक सुनील चौहान भील निम्बाहेड़ा ने किया। आयोजकों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, संघर्ष, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और संवैधानिक अधिकारों को समझने तथा नई पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़ने का महत्वपूर्ण दिन है।

चित्तौड़गढ़ में राष्ट्रीय भील सेना ने मनाया विश्व आदिवासी दिवस, शिक्षा और अधिकारों पर जोर
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघाड़ को भी संबोधित करना था, लेकिन मौसम खराब होने के कारण वे कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने जूम मीटिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़कर सभा को संबोधित किया। उन्होंने आदिवासी समाज की एकता, अधिकारों और सामाजिक विकास पर विचार रखते हुए युवाओं से शिक्षा एवं सामाजिक जागरूकता के साथ आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए समाज की एकजुटता और अधिकारों के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया।


मथुरा से गोपाल दास जी महाराज को भी कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन समय के अभाव के चलते वे उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से समाजजनों को विश्व आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के साथ उसके गहरे संबंध का उल्लेख करते हुए समाज से अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने तथा आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने का आह्वान किया।

चित्तौड़गढ़ में राष्ट्रीय भील सेना ने मनाया विश्व आदिवासी दिवस, शिक्षा और अधिकारों पर जोर
कार्यक्रम में धरियावद विधायक थावरचंद डामोर ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने आदिवासी समाज की समस्याओं और अधिकारों पर विचार रखते हुए कहा कि समाज की प्रगति के लिए शिक्षा, संगठन तथा राजनीतिक एवं सामाजिक जागरूकता जरूरी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपरा और इतिहास रहा है। समाज को अपनी पहचान और संस्कृति पर गर्व करते हुए आधुनिक शिक्षा एवं नई तकनीक के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने युवाओं से सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने तथा समाज को मजबूत और एकजुट करने का आह्वान किया।

राष्ट्रीय संयोजक गोपाल भील आकोड़िया ने कहा कि संगठन को मजबूत करने के साथ समाज की आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करना भी जरूरी है। उन्होंने शिक्षा को समाज की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए भील समाज के विद्यार्थियों के लिए निःशुल्क महाविद्यालय खोलने की दिशा में सामूहिक प्रयास करने की बात कही। उन्होंने कहा कि आर्थिक कमजोरी किसी भी बच्चे की पढ़ाई में बाधा नहीं बननी चाहिए। राष्ट्रीय भील सेना को गांव-गांव तक मजबूत करते हुए शिक्षा, रोजगार और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि संगठन, शिक्षा और एकता से ही समाज सशक्त बनेगा।

राष्ट्रीय सहसंयोजक सुनील चौहान भील निम्बाहेड़ा ने कहा कि भील समाज की एकता और ताकत को कमजोर करने के प्रयास लंबे समय से होते रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि समाज किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल के पीछे नहीं, बल्कि अपने अधिकारों और भविष्य के पीछे खड़ा हो। उन्होंने शिक्षा, संगठन और एकता के माध्यम से समाज की आवाज को मजबूत करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर सामूहिक रूप से आवाज उठाने से ही सामाजिक समस्याओं का समाधान संभव है।

कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी संस्कृति और परंपराओं का रंग देखने को मिला। समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में कार्यक्रम में पहुंचे। आदिवासी लोक संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक एकता ने कार्यक्रम को विशेष रूप दिया। कार्यक्रम में युवाओं की भी बड़ी भागीदारी रही। युवाओं ने शिक्षा, रोजगार और समाज के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, आदिवासी अधिकार और युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अधिकार प्रमुख मुद्दों में रहे। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं में समाज के कमलेश भील मोगरवासा एवं जिला अध्यक्ष मुकेश भील सहित कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम के सफल आयोजन के बाद गोपाल भील आकोड़िया एवं सुनील चौहान भील निम्बाहेड़ा ने सभी समाजजनों, अतिथियों, युवाओं और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विपरीत मौसम के बावजूद समाजजनों की बड़ी भागीदारी आदिवासी समाज की अपनी संस्कृति, पहचान और अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है।।कार्यक्रम के समापन पर समाजजनों ने आदिवासी एकता, संस्कृति एवं सामाजिक अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। आयोजकों ने कहा कि राष्ट्रीय भील सेना आगे भी समाज के सामाजिक, शैक्षणिक और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती रहेगी।

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