चित्तौड़गढ़। शहर के कुंभा नगर में मंगलवार देर शाम तेज बारिश के बीच नगर परिषद की फॉगिंग ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। आसमान से पानी बरस रहा था और जमीन पर फॉगिंग मशीन धुआं छोड़ रही थी। नजारा देखकर सवाल उठना स्वाभाविक था, जब बारिश ही फॉग को धोकर ले जा रही थी, तो आखिर यह फॉगिंग किसके लिए थी?
मच्छरों के खात्मे के लिए की जा रही फॉगिंग उस समय की जा रही थी, जब मौसम ने पहले ही पानी की ‘फॉगिंग’ कर रखी थी। बारिश की तेज धार के बीच निकलता धुआं कुछ ही पलों में हवा और पानी के साथ गायब होता नजर आया। ऐसे में लोगों के बीच चर्चा रही कि मच्छरों पर दवा का असर हुआ या सरकारी संसाधनों पर बारिश भारी पड़ गई?
नगर परिषद का उद्देश्य निश्चित रूप से मच्छरों पर नियंत्रण करना होगा, लेकिन सवाल समय और तरीके को लेकर है। यदि तेज बारिश में फॉगिंग की जा रही है तो क्या इसका अपेक्षित परिणाम मिल पाएगा? और यदि बारिश के कारण दवा का प्रभाव कम होना तय है, तो फिर यही काम बारिश थमने के बाद क्यों नहीं किया गया?
बारिश में फॉगिंग की जानकारी संज्ञान में आने के बाद नगर परिषद के जिम्मेदारों ने मामला दिखवाने की बात कही।
लेकिन जनता का सवाल सीधा है, फॉगिंग मच्छरों के लिए थी या सिर्फ खानापूर्ति के लिए? बारिश के बीच फॉगिंग का यह दृश्य अब चर्चा का विषय बना हुआ है। नागरिकों का कहना है कि मच्छर नियंत्रण जैसे जरूरी अभियान में सिर्फ मशीन चलाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सही समय, सही मौसम और सही तरीके से कार्रवाई भी जरूरी है। आखिर सरकारी मशीनरी का मकसद सिर्फ धुआं निकालना नहीं, बल्कि उसका असर जमीन पर दिखाई देना होना चाहिए।



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