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चित्तौड़गढ़: प्रस्तावित फर्टिलाइजर प्लांट का विरोध शुरू

 ओम भट्ट, 8000191859 

चित्तौड़गढ़। चित्तौड़गढ़ में हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड का प्रस्तावित फर्टिलाइजर प्लांट स्थानीय विरोध के घेरे में घिरता नज़र आ रहा है। फर्टिलाइजर प्लांट की 10 मार्च की जनसुनवाई से पहले ही ग्रामीणों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब हिंदुस्तान जिंक के स्मेल्टर प्लांट के कारण क्षेत्र पहले ही प्रदूषण की मार झेल रहा है तो उसी के पास एक और रासायनिक इकाई थोपने की जल्दी क्यों की जा रही है।


ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से रिसते खतरनाक कैमिकल ने आसपास के गांवों की हवा और पानी दोनों को बिगाड़ दिया है। पेयजल स्रोत दूषित, पशुधन काल के गाल में समा रहा है, खेतों की उपज घट रही है और कैंसर, हार्ट अटैक व चर्म रोग जैसी बीमारियां आम होती जा रही हैं। उनका कहना है कि यह विकास नहीं, धीरे-धीरे मौत की ओर धकेलने जैसा है। ऐसे में फर्टिलाइजर प्लांट की नई इकाई आग में घी डालने जैसा कदम साबित होगी।

ग्रामीणों का गुस्सा इस बात पर भी है कि वे वर्षों से जनप्रतिनिधियों के दरवाजे खटखटा रहे हैं। चित्तौड़गढ़ विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और कपासन विधायक अर्जुनलाल जीनगर ने विधानसभा में मुद्दा उठाया, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि उद्योग का दबदबा स्थानीय आवाज़ों पर भारी पड़ रहा है।

आखिरकार नाराज ग्रामीण सीधे आरएलपी सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल के आवास जा पहुंचे। बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि यह लड़ाई आने वाली पीढी को ज़हर बांटने वाले उद्योग बनाम इंसान की लड़ाई है। बेनीवाल ने भी कड़ा रुख दिखाते हुए कहा कि यह मामला केवल परियोजना का नहीं, बल्कि लोगों के जीवन, स्वास्थ्य, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि जनता की अनदेखी की गई तो मामला राष्ट्रीय स्तर पर उठेगा और जल्द ही केंद्रीय पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया जाएगा।

अब 10 मार्च की जनसुनवाई सिर्फ औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य की परीक्षा बन चुकी है। एक तरफ उद्योग का विस्तार, दूसरी तरफ लोगों की सांसों और जमीन का सवाल। देखना ये होगा कि इस टकराव में आखिर किसकी आवाज़ भारी पड़ती है।

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