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मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बीएससी नर्सिंग मान्यता विवाद गहराया: दो दिनों से धरने पर छात्र, पुलिस व प्रशासन के साथ छात्रों की धक्का-मुक्की, 30 कश्मीरी समेत 33 छात्र निलंबित


 ओम भट्ट, 8000191859 

चित्तौड़गढ़। मेवाड़ यूनिवर्सिटी में बी.एससी. नर्सिंग पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर विवाद अब गंभीर रूप ले चुका है। बुधवार से विश्वविद्यालय परिसर में धरना दे रहे छात्रों और पुलिस के बीच गुरुवार को धक्का-मुक्की की घटना सामने आई। छात्रों का आरोप है कि उन्हें आवाज उठाने पर जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 30 कश्मीरी छात्रों सहित कुल 33 छात्रों को निलंबित कर दिया है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

यह पूरा विवाद राजस्थान नर्सिंग काउंसिल (RNC) और इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) की अनिवार्य मान्यता को लेकर खड़ा हुआ है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियों के बिना बी.एससी. नर्सिंग कोर्स संचालित कर रहा है, जिससे उनकी डिग्री, प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन और भविष्य की नौकरी पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

JKSSS के तहत पढ़ रहे हैं 50 से अधिक छात्र

बताया जा रहा है कि बी.एससी. नर्सिंग कोर्स में 50 से अधिक कश्मीरी छात्र नामांकित हैं, जो जम्मू-कश्मीर स्पेशल स्कॉलरशिप स्कीम (JKSSS) के तहत यहां अध्ययन कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि उन्हें यह जानकारी मिली थी कि कोर्स को आवश्यक मान्यता प्राप्त नहीं है। तब से छात्र मान्यता की मांग कर रहे हैं।

एक छात्र ने बताया वे यहां JKSSS के तहत यहां पढ़ाई कर रहे हैं। अगर कोर्स को RNC और INC की मान्यता नहीं है तो उनकी डिग्री का क्या होगा? हमारा भविष्य अधर में है।

2024 में भी हुआ था बड़ा प्रदर्शन

यह पहली बार नहीं है जब छात्रों ने इस मुद्दे को उठाया हो। साल 2024 में भी बी.एससी. नर्सिंग के छात्रों ने RNC और INC की मान्यता की मांग को लेकर लंबा धरना-प्रदर्शन किया था। उस समय कई दिनों तक हड़ताल चली और छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार किया था।

छात्रों का कहना था कि बिना वैधानिक स्वीकृति के कोर्स चलाया जाना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है। लंबे विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने वार्ता कर छात्रों को आश्वासन दिया था कि आवश्यक स्वीकृतियां जल्द प्राप्त कर ली जाएंगी।

हाईकोर्ट में आवेदन पर सहमति, हुआ था समझौता

छात्रों ने बताया कि विवाद के दौरान एक लिखित समझौता भी सामने आया था। समझौता पत्र के अनुसार कुलपति डॉ. आलोक मिश्रा ने यह सहमति दी थी कि 4 दिसंबर 2024 को माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई के दौरान, यदि राज्य सरकार की ओर से मेवाड़ विश्वविद्यालय को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) देने में असमर्थता जताई जाती है, तो छात्रों की ओर से भी न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया जाएगा।

इस आवेदन में न्यायालय से उपयुक्त राहत की मांग की जानी थी, जिसमें आवश्यकता पड़ने पर छात्रों को किसी अन्य मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय में स्थानांतरित करने का अनुरोध भी शामिल होगा। विशेष रूप से ऐसे संस्थान में जो JKSSS योजना के अंतर्गत छात्रों को प्रवेश देता हो।

विश्वविद्यालय द्वारा छात्रों के इस अनुरोध को स्वीकार किए जाने के बाद उस समय प्रदर्शन समाप्त कर दिया गया था। छात्रों ने विश्वविद्यालय के रुख को छात्र हितैषी बताते हुए हड़ताल वापस ले ली थी।

आरोप: आश्वासन के बावजूद नहीं निकला समाधान

छात्रों का आरोप है कि समझौते और लिखित आश्वासन के बावजूद आज तक न तो स्पष्ट रूप से मान्यता की स्थिति बताई गई है और न ही कोई ठोस समाधान सामने आया है। उनका कहना है कि प्रशासन बार-बार समय मांग रहा है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ रही है।

वर्तमान धरना और पुलिस से धक्का-मुक्की

बुधवार से छात्र एक बार फिर धरने पर बैठ गए। गुरुवार को परिसर में स्थिति तनावपूर्ण हो गई और छात्रों व पुलिस के बीच कथित रूप से झड़प हुई। छात्रों का आरोप है कि शांतिपूर्ण विरोध के बावजूद उन्हें डराया-धमकाया जा रहा है।

छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें प्रदर्शन जारी रखने पर जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। वे सिर्फ अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। 

33 छात्रों का निलंबन

धरने के बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने 30 कश्मीरी छात्रों सहित कुल 33 छात्रों को निलंबित कर दिया। छात्रों का कहना है कि अपनी शैक्षणिक सुरक्षा को लेकर सवाल उठाना अनुशासनहीनता नहीं है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई छात्रों की आवाज दबाने के उद्देश्य से की गई है।

छात्रों की मुख्य मांग

छात्रों की मांग है कि या तो विश्वविद्यालय तत्काल आवश्यक मान्यता प्राप्त करे या उन्हें उसी वर्ष और सेमेस्टर को बरकरार रखते हुए किसी मान्यता प्राप्त कॉलेज या विश्वविद्यालय में स्थानांतरित किया जाए।

उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होंगे।

राजनीतिक हस्तक्षेप की मांग

छात्रों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, नव नियुक्त शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि वे अपने गृह राज्य से दूर पढ़ाई कर रहे हैं और ऐसे में उन्हें सरकारी संरक्षण की अपेक्षा है।

बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?

यह विवाद उच्च शिक्षा संस्थानों में नियामकीय अनुपालन और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। यदि किसी पेशेवर कोर्स के लिए आवश्यक स्वीकृतियां लंबित हैं, तो इसकी स्पष्ट जानकारी छात्रों को देना और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना संस्थान की जिम्मेदारी है।

हड़ताल अनावश्यक, नर्सिंग छात्रों का भविष्य सुरक्षित 

इधर मेवाड़ विश्वविद्यालय के नर्सिंग पाठ्यक्रम को लेकर चल रही छात्रों की हड़ताल को रजिस्ट्रार सी.डी. कुमावत ने बयान जारी किया है। उन्होंने हड़ताल को अनावश्यक बताते हुए कहा है कि यह आंदोलन तथ्यों पर आधारित नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक जानकारियां पूर्व में ही छात्रों को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं।

कुमावत ने कहा कि वर्ष 2022-23 में नर्सिंग कोर्स प्रारंभ करते समय विश्वविद्यालय के पास सक्षम प्राधिकारी एवं न्यायालय के आदेश उपलब्ध थे। उन्हीं आदेशों के आधार पर 2022-23 और 2023-24 में प्रवेश दिए गए। इसके पश्चात 2024-25 और 2025-26 सत्रों में भी राज्य सरकार के निर्देशों एवं न्यायालय के आदेशों के अनुरूप प्रवेश प्रक्रिया संपन्न की गई।

उन्होंने कहा कि मामला न्यायालय में प्रस्तुत होने पर न्यायालय ने विश्वविद्यालय का पक्ष सुनने के बाद एनओसी प्रदान करने के निर्देश दिए थे तथा सरकार को 30 दिनों के भीतर पुनः निरीक्षण कराने का अवसर दिया था। निर्धारित अवधि में न तो पुनः निरीक्षण कराया गया और न ही एनओसी जारी की गई। ऐसी स्थिति में न्यायालय के आदेशानुसार एनओसी को स्वीकृत माना जाना चाहिए।

रजिस्ट्रार ने बताया कि वर्ष 2025 में राज्य सरकार द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार सभी नर्सिंग संस्थानों को पुनः एनओसी के लिए आवेदन करने को कहा गया था। विश्वविद्यालय ने विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति ने परिसर का निरीक्षण किया तथा रिपोर्ट सरकार को प्रेषित कर दी गई। वर्तमान में प्रकरण राज्य सरकार के स्तर पर लंबित है और सीएमओ कार्यालय से निर्देश प्राप्त होने की प्रतीक्षा है।

कुमावत का कहना है कि विश्वविद्यालय का अपना अधिनियम है, जो विधानसभा से पारित है और जिसके अंतर्गत नर्सिंग कोर्स संचालित करने का प्रावधान है। तकनीकी रूप से एनओसी की आवश्यकता नहीं है, फिर भी पारदर्शिता के तहत सभी औपचारिकताएं पूर्ण की गई हैं। जीएनएम और बीएससी नर्सिंग दोनों पाठ्यक्रमों का निरीक्षण संयुक्त रूप से हुआ है। जीएनएम की परीक्षाएँ संबंधित परिषद द्वारा आयोजित की जाती हैं, जबकि बीएससी नर्सिंग की परीक्षाएं विश्वविद्यालय द्वारा कराई जा रही हैं।

रजिस्ट्रार ने कहा कि कुछ छात्रों में भ्रम की स्थिति है, जिसे दूर करने के लिए प्रशासन संवाद कर रहा है। छात्रों को आरएनसी और आईएनसी की मान्यता प्राप्त होगी तथा किसी भी छात्र की डिग्री में देरी नहीं होगी। उनका शैक्षणिक भविष्य पूर्णतः सुरक्षित है।

फिलहाल 33 छात्रों का निलंबन, विवाद और मान्यता को लेकर अनिश्चितता, इन सबने दर्जनों छात्रों का भविष्य अधर में डाल दिया है। अब देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन, राजस्थान सरकार और जम्मू-कश्मीर का नेतृत्व इस संवेदनशील मामले को किस प्रकार सुलझाते हैं। क्योंकि दांव पर केवल एक संस्थान की साख नहीं, बल्कि उन छात्रों का भविष्य है, जो अपने सपनों के साथ यहां पढ़ने आए थे और अब असमंजस की स्थिति में खड़े हैं।

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