रिपोर्टर: दुर्गाशंकर मेघवाल
चित्तौड़गढ़: रावतभाटा के जावदा–निमड़ी क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कंवरपुरा में बीते एक माह से खौफ का पर्याय बना खूंखार लेपर्ड आखिरकार वन विभाग के पिंजरे में कैद हो गया। लगातार तीन मवेशियों को शिकार बनाए जाने के बाद गांव में दहशत का माहौल था और ग्रामीण हर रात डर के साये में जीने को मजबूर थे।
लेपर्ड की बार-बार क्षेत्र में मौजूदगी की सूचनाओं के बाद वन विभाग हरकत में आया और रणनीतिक रूप से पिंजरा लगाया गया। आज सुबह वही लेपर्ड पिंजरे में कैद मिला, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली और एक बड़ी अनहोनी टल गई।
उप वन संरक्षक राहुल झाझरिया एवं सहायक वन संरक्षक शोभाराम गुर्जर के निर्देशन में, क्षेत्रीय वन अधिकारी नारायण सिंह कच्छवा की निगरानी में यह सफल रेस्क्यू ऑपरेशन अंजाम दिया गया। अभियान में नाका प्रभारी रणदीप जाट, वनकर्मी सोना राठौर, उमेश गाँच्छा, युधिष्ठिर वीरवाल, अल्ताफ़ ख़ान, कमलेश जाट, सुभाष भाटी, प्रहलाद सिंह राठौड़, चौकीदार बागदीराम, पशुपालन विभाग के मुकेश मीणा, गोपाल मीणा, साथ ही पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रहलाद धाकड़, दुर्गाशंकर मेघवाल और समस्त ग्रामवासियों का अहम सहयोग रहा।
लेपर्ड को पूरी तरह सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है और अब नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा रही है। लेपर्ड के पकड़े जाने के बाद गांव में हालात सामान्य हो गए हैं और दहशत का माहौल खत्म हो गया है।
वन विभाग ने ग्रामीणों का आभार जताते हुए अपील की है कि किसी भी वन्यजीव की गतिविधि की सूचना तुरंत विभाग को दें और खुद जोखिम न उठाएं।





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